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पाकिस्तान का आतंकवाद पर साथ छोड़ रहा है चीन, चीनी राजदूत ने दिया दो टूक संकेत

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ऐसा लगने के कई कारण हैं कि पाकिस्तान का सदाबहार दोस्त चीन भी अब उसके साथ हर मुश्किल हालात में खड़े रहने की अपनी नीति बदल रहा है. भले ही चीनी अध्यक्ष के चलते फाइनेंशियल एक्शन टेरर फोर्स (FATA) ने पाकिस्तान को प्रतिबंध से फौरी राहत दे दी हो, लेकिन इसके साथ शर्ते लागू करने में कोई कोताही नहीं बरती गई है. यही नहीं, संभवतः पहली बार चीन ने साफ तौर पर हर तरह के आतंकवाद की कड़ी निंदा करते हुए वैश्विक समुदाय से आतंक के खिलाफ लड़ाई में मजबूती से खड़े रहने का भी आह्वान किया है. इसके पहले शुक्रवार को एफएटीए ने दो टूक लहजे में कहा था कि टेरर फंडिंग पर तत्काल प्रभाव से रोक और अपनी सरजमीं से आंतकवाद फैलाने वाले गुटों पर रोक लगाने में असफल साबित होने पर पाकिस्तान को सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा. इसके लिए पाकिस्तान को फरवरी 2020 तक का समय दिया गया है.

 

चीनी राजदूत ने दोहराया आतंक से लड़ाई में समर्थन
समाचार एजेंसी एएनआई से खास बातचीत में भारत में चीनी राजदूत सू वीडोंग ने तमिलनाडु में शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अनौपचारिक वार्ता का हवाला देते हुए कहा कि भारत-चीन हर तरह के आतंकवाद के सफाये और उसके खिलाफ लड़ाई के लिए प्रतिबद्ध हैं. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि चीन ने अन्य देशों से भी आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एकजुट होने का आह्वान किया है.

 

चीन की दो टूक से पाकिस्तान पर संकट के बादल गहराए
गौरतलब है कि इसी साल की शुरुआत में फाइनेंशियल एक्शन टेरर फोर्स (FATA) की अध्यक्षता चीन के पास गई थी. उसी वक्त से ऐसा माना जा रहा था कि अंततोगत्वा चीन की मदद से पाकिस्तान ग्रे लिस्ट में होने और उसके अनुरूप शर्तों को पूरा नहीं करने के बावजूद प्रतिबंधित होने से बच जाएगा. हुआ भी कुछ ऐसा और पाकिस्तान को एफएटीए की बैठक में फरवरी तक की फौरी राहत मिल गई. हालांकि इतने भर से पाकिस्तान पर छाए संकट के बादल छंट नहीं गए हैं. उलटे अगर देखा जाए तो कहीं और ज्यादा गहरा गए हैं. खासकर अगर पाकिस्तान टेरर फंडिंग और आतंकवाद के सफाए के मामले में ढुलमुल रवैया अपनाता है, तो उसे प्रतिबंधित होने से कोई नहीं बचा सकेगा. यहां तक कि इस बाबत फरमान चीन की सहमति से ही आएगा.

 

मोदी 2.0 सरकार की बड़ी जीत
इस लिहाज से देखें तो मोदी 2.0 सरकार की यह एक बड़ी कूटनीतिक जीत है. वुहान अनौपचारिक वार्ता का अगला पड़ाव करार दी गई ममल्लापुरम बैठक इस लिहाज से सफल कही जा सकती है. इस बैठक में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद और उसके प्रणेता बतौर पाकिस्तान पर खुलकर बात की. इसके बाद अंदरखाने यह सहमति बनी कि पहले से कंगाली झेल रहे पाकिस्तान को एफएटीए द्वारा प्रतिबंधित करने से भारत के लिए खतरा और बढ़ेगा. इसके बाद भारत ने एफएटीए की बैठक में थोड़ा नरम रुख अपनाया. हालांकि चीन ने भारत से दोस्ती को अमली जामा पहनाने के लिए पाकिस्तान को दो टूक चेतावनी जारी करने में हिचक नहीं दिखाई.

बेकार रही इमरान खान की कवायद
इसके पहले तमाम वैश्विक मंचों पर भारत मय सबूत पाकिस्तान प्रेरित आतंकवाद को उसकी नीति करार देने में सफल रहे थे. भारत के लिए यह कम बड़ी बात नहीं है कि अमेरिका समेत विकसित देश और अब चीन भी सहमत नजर आ रहा है. एफएटीए की बैठक के बाद आतंकवाद के मसले पर चीन की कड़ी फटकार भारत की पेशबंदी की ही एक कड़ी है. यहां यह भी नहीं भूलना नहीं चाहिए कि भारत यात्रा से पहले चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से दरबार में हाजिरी लगाने खुद पाकिस्तान के वजीर-ए-आजम इमरान खान और सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा पहुंचे थे, लेकिन उनकी यह कसरत भी चीन का रुख बदलने में नाकाम रही.