पचोर। स्मार्ट मीटर और बढ़े हुए बिजली बिलों के विरोध में गुरुवार को पचोर कांग्रेस सड़क पर उतरी। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शहर में रैली निकाली, बिजली विभाग कार्यालय पहुंचकर धरना दिया और ज्ञापन सौंपा। लेकिन प्रदर्शन के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा बिजली बिलों की नहीं, बल्कि महिलाओं के हाथों में दिखाई दे रही तख्तियों और उन पर लिखे राजनीतिक नारों की रही।

एक दौर में देश की राजनीति में चर्चित रहे महंगाई विरोधी नारों को कांग्रेस ने नए अंदाज में फिर से मैदान में उतारा। प्रदर्शन में महिलाओं की तख्तियों पर लिखा था- “महंगाई डायन खाए जात है”, वहीं एक अन्य नारे ने लोगों का ध्यान खींचा- “बीजेपी के बूढ़े बैल खा गए शक्कर, पी गए तेल।”
अटल सरकार के दौरान यह नारा 1990 के दशक और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौर में महंगाई को लेकर होने वाली राजनीतिक बयानबाजी की याद दिलाता है। उस समय खाद्य वस्तुओं और जरूरी सामानों के बढ़ते दामों को लेकर सत्ता पक्ष पर तंज कसने के लिए ऐसे नारों का इस्तेमाल किया जाता था। अब करीब तीन दशक बाद पचोर में कांग्रेस ने इसे बदलते राजनीतिक संदर्भ में भाजपा सरकार के खिलाफ इस्तेमाल किया।
प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं पर बिजली बिल का बोझ बढ़ रहा है। पहले से महंगाई की मार झेल रहे आम लोगों के लिए बिजली के बिल नई परेशानी बन गए हैं।
बिजली विभाग पहुंचकर दिया ज्ञापन
शहर के विभिन्न क्षेत्रों से कांग्रेस कार्यकर्ता रैली के रूप में एकत्र हुए। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल रहीं। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए बिजली विभाग कार्यालय तक रैली निकाली और वहां धरने पर बैठ गए।
कांग्रेस ने स्मार्ट मीटर व्यवस्था और बढ़े हुए बिजली बिलों पर सवाल उठाते हुए अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान करने और बढ़े हुए बिलों की शिकायतों की जांच की मांग की।
पचोर का यह प्रदर्शन स्मार्ट मीटर और बिजली बिल विरोध से आगे बढ़कर राजनीतिक नारों की वजह से भी चर्चा में आ गया। करीब 30 साल बाद पुराने दौर का महंगाई विरोधी नारा नए शब्दों और नए राजनीतिक निशाने के साथ फिर सड़कों पर सुनाई दिया।