सरेड़ी में गांव से आधा किलोमीटर दूर खंडहर में आंगनवाड़ी का विरोध: ग्रामीण बोले सुविधा के लिए गांव में खोली थी, क्या नाला पार कर जाएंगे मासूम
पचोर महिला बाल विकास परियोजना क्षेत्र के सरेड़ी गांव में स्थित आंगनवाड़ी केंद्र को शासकीय भवन के नाम पर एक खंडहर भवन में रंगरोगन कर शिफ्ट किए जाने का विरोध सरेड़ी गांव के ग्रामीणों ने शुरू कर दिया है। ग्रामीणों ने परियोजना अधिकारी को इस विषय का ज्ञापन भी सौंपा है।
दरअसल, प्रशासन के अनुसार सरेड़ी गांव में नवीन आंगनवाड़ी भवन पंचायत द्वारा निर्माण किया गया था। और आंगनवाड़ी क्रमांक 1 किराए के निजी भवन में संचालित है। ऐसे में इसे सरकारी भवन में शिफ्ट किया जाना है। लेकिन ग्रामीणों के अनुसार निर्माण के समय हनुमान मंदिर के समीप सामुदायिक भवन बताया और ग्रामीणों ने भी इसे सामुदायिक भवन के रूप में उपयोग करना शुरू कर दिया। जहां अब मंदिर के भक्तो का कब्जा है। इधर जनपद ने भवन सौंपने की तैयारी कर दी ऐसे में किराए के मकान से शासकीय भवन में आंगनवाड़ी केंद्र ले जाया जा रहा है।
लेकिन मौके पर नई बिल्डिंग में कब्जा होने की वजह से पचोर परियोजना अधिकारी इसे पास के ही एक जर्जर भवन में रंगरोगन कर शिफ्ट करना चाहते है। ऐसे में ग्रामीणों को दो डर सता रहे है।
दो दर्जन से अधिक ग्रामीणों ने आवेदन देते हुए बताया की नवीन कक्ष को मंदिर कक्ष के रूप में उपयोग किया जा रहा है। साथ ही केंद्र क्रमांक 1 गांव के बीच में है ऐसे में हमारे दो साल पांच साल के छोटे बच्चे सुरक्षित महसूस करते है। अगर आंगनवाड़ी केंद्र को वहां ले जाया गया तो पहला खतरा जर्जर भवन का है। साथ ही बच्चों को नाला पार करके आधा किलोमीटर दूर जाना होगा जो संभव और सुरक्षित नहीं है।

मामले में परियोजना अधिकारी रचना रावत ने बताया की ग्रामीणों का आवेदन आया है। प्रशासन भवन बनवा चुका है लेकिन उसपर कब्जा है। बच्चों की सुरक्षा की भी जिम्मेदारी हम समझते है ऐसे में हम वरिष्ठ अधिकारियो से चर्चा उपरांत कोई निर्णय लेंगे।
