पड़ाना। सारंगपुर क्षेत्र का छोटा सा कस्बा पड़ाना इन दिनों प्राचीन खेड़ापति हनुमान मंदिर के कारण आसपास के जिलों में पहचान बना रहा है। मंगलवार और शनिवार को यहां विशेष रूप से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। राजगढ़ के अलावा गुना और शाजापुर जिले से भी भक्त बाबा के दर्शन और प्रसाद के लिए पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की आस्था के साथ मंदिर में होने वाली सेवा और भंडारे भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
मंदिर के पुजारी मनोज शर्मा का परिवार हलवाई परिवार है। शर्मा परिवार मंदिर की सेवा से जुड़ा हुआ है। मनोज शर्मा बताते हैं कि पिछले दो-तीन वर्षों से उन्हें हनुमानजी की प्रेरणा का अनुभव होता है। इसी भाव से वे सामाजिक और राजनीतिक विषयों को लेकर सहज रूप से भविष्यवाणियां बताते हैं। उनके अनुसार, उनके द्वारा कही गई कुछ बातें बाद में सही साबित हुईं। हालांकि इन बातों को श्रद्धालु अपनी आस्था और विश्वास के नजरिए से देखते हैं।
अपने खर्च से कराते हैं भंडारा
मंदिर में समय-समय पर भंडारे का आयोजन किया जाता है। खास बात यह है कि शर्मा हलवाई परिवार भंडारे का खर्च स्वयं उठाता है। परिवार इसे धार्मिक आयोजन से ज्यादा बाबा की सेवा मानता है। मंदिर आने वाले श्रद्धालु दर्शन के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं।
‘पहले भोजन, फिर भजन’ की भावना
मनोज शर्मा कहते हैं कि हनुमानजी की महिमा देश-दुनिया में फैल रही है। पड़ाना में भी बाबा की कृपा से लगातार श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। वे नीम करौली बाबा की सीख का उल्लेख करते हुए कहते हैं कि पहले भूखे को भोजन कराना चाहिए, क्योंकि भूखे पेट भजन में मन नहीं लगता। इसी भावना से मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को भोजन और प्रसाद कराया जाता है।
शर्मा कहते हैं कि उनके परिवार के लिए सबसे बड़ा सौभाग्य यही है कि दिन की शुरुआत बाबा के दर्शन से होती है। “बाबा की सेवा का अवसर मिलना हमारे लिए सौभाग्य है। जो भी सेवा हो पाती है, उसे हम हनुमानजी का आशीर्वाद मानकर करते हैं।”
मंगलवार और शनिवार को मंदिर में बढ़ती भीड़ और दूसरे जिलों से पहुंच रहे श्रद्धालु यह बता रहे हैं कि पड़ाना का यह प्राचीन मंदिर अब स्थानीय आस्था से आगे बढ़कर आसपास के क्षेत्रों के लिए भी श्रद्धा का केंद्र बनता जा रहा है।