आज 14 सितंबर, सोमवार को देशभर में गणेश चतुर्थी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। घर-घर गणपति बप्पा के स्वागत की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। भक्त ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ भगवान गणेश की प्रतिमा घर लेकर आएंगे और विधि-विधान से उनकी स्थापना करेंगे। हालांकि, इस बार गणेश चतुर्थी पर शुभ योगों के साथ भद्रा का साया भी रहेगा। ऐसे में गणपति स्थापना को लेकर लोगों के मन में शुभ मुहूर्त को लेकर सवाल हैं।
हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूजनीय देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणेशजी की पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि विधिवत गणेश पूजा करने से बुद्धि, ज्ञान, बल, विवेक और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश का जन्मोत्सव मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी से शुरू होने वाला यह उत्सव अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन के साथ संपन्न होता है।
इस बार गणेश चतुर्थी पर बन रहे हैं कई शुभ संयोग
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस बार गणेश चतुर्थी पर रवि योग के साथ ब्रह्म योग और इंद्र योग का शुभ संयोग बन रहा है। इन योगों को धार्मिक दृष्टि से शुभ और कल्याणकारी माना जाता है। मान्यता है कि शुभ योग में भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने से सकारात्मक फल प्राप्त होते हैं।
कितने बजे शुरू हुई चतुर्थी तिथि?
पंचांग के अनुसार गणेश चतुर्थी की चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 3:36 बजे शुरू हुई है। यह तिथि 15 सितंबर को सुबह 4:14 बजे तक रहेगी। भगवान गणेश की पूजा के लिए मध्याह्न काल को विशेष रूप से शुभ माना गया है।
गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त
गणेशजी की प्रतिमा स्थापित करने और पूजा करने का शुभ मुहूर्त 14 सितंबर को दोपहर 12:30 बजे से 3:02 बजे तक रहेगा। इस दौरान कुल 2 घंटे 32 मिनट का समय मिलेगा।
भक्त इस अवधि में गणपति बप्पा को घर लाकर विधि-विधान से स्थापित कर सकते हैं। स्थापना के समय भगवान गणेश की प्रतिमा का मुख उचित दिशा में रखते हुए पूजा स्थल को पहले से तैयार कर लेना चाहिए।
3:50 बजे से शुरू होगी भद्रा
गणेश चतुर्थी पर इस बार भद्रा को लेकर भी विशेष चर्चा है। पंचांग के अनुसार 14 सितंबर को दोपहर 3:50 बजे से भद्रा शुरू होगी, जो 15 सितंबर की सुबह 4:14 बजे समाप्त होगी।
इसलिए गणेश स्थापना के लिए बताए गए दोपहर के शुभ मुहूर्त और भद्रा के समय को लेकर भक्तों को भ्रमित होने की जरूरत नहीं है। निर्धारित स्थापना मुहूर्त दोपहर 12:30 से 3:02 बजे तक है, जबकि भद्रा की शुरुआत इसके बाद 3:50 बजे से होगी।
घर में गणपति की स्थापना कैसे करें?
गणपति बप्पा की स्थापना के लिए सबसे पहले पूजा स्थल और चौकी को साफ कर गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें। इसके बाद चौकी पर लाल या पीले रंग का साफ अथवा नया कपड़ा बिछाएं। कपड़े पर अक्षत रखें और उसके ऊपर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
प्रतिमा स्थापित करने के बाद भगवान गणेश को स्नान कराएं और गंगाजल अर्पित कर शुद्ध करें। मूर्ति के दोनों ओर रिद्धि-सिद्धि के प्रतीक के रूप में एक-एक सुपारी रखी जा सकती है। भगवान गणेश की मूर्ति के दाईं ओर जल से भरा कलश रखें।
इसके बाद बप्पा को वस्त्र, फूल, माला, अक्षत, फल और मिठाई अर्पित करें। धूप और दीप जलाकर भगवान गणेश की पूजा करें। पूजा के अंत में गणपति बप्पा की आरती उतारें और परिवार के सभी सदस्य भगवान का आशीर्वाद लें।
पूजा में इस मंत्र का करें जाप
गणेश चतुर्थी की पूजा के दौरान भगवान गणेश के मंत्र “ॐ गं गणपतये नमः” का जाप करना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्र का जाप कर भगवान गणेश का ध्यान कर सकते हैं।
गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा देखने की क्यों है मनाही?
गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन को धार्मिक मान्यता में वर्जित माना गया है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा को देखने से मिथ्या दोष या मिथ्या कलंक लग सकता है। धार्मिक कथाओं में इसे भगवान गणेश से जुड़ी मान्यता से जोड़ा जाता है।
पंचांग के अनुसार 14 सितंबर को सुबह 11:32 बजे से रात 8:50 बजे तक चंद्र दर्शन से बचने का समय रहेगा। इसलिए इस अवधि में विशेष रूप से चंद्रमा को देखने से बचने की सलाह दी जाती है।
अनंत चतुर्दशी पर होगी बप्पा की विदाई
गणेश चतुर्थी पर स्थापना के बाद भक्त अपनी परंपरा के अनुसार गणपति बप्पा की नियमित पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा। श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ बप्पा को विदाई देंगे और अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना करेंगे।