राजगढ़। साइबर ठगी में अक्सर पैसा गंवाने वाले व्यक्ति और ठगी करने वाले आरोपी की कहानी सामने आती है, लेकिन राजगढ़ पुलिस की ऑपरेशन FAST-2.0 के तहत हुई कार्रवाई ने साइबर फ्रॉड की एक ऐसी कड़ी सामने रखी है, जिस पर आम आदमी शायद ही ध्यान देता है—ठगी में इस्तेमाल होने वाली SIM आखिर किसके नाम पर है और वह आरोपी तक पहुंची कैसे?
जिले में साइबर सेल से मिले संदिग्ध मोबाइल नंबरों की तकनीकी जांच के बाद पुलिस ने अलग-अलग थाना क्षेत्रों में 8 आपराधिक प्रकरण दर्ज किए हैं। 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 2 की तलाश जारी है। जांच में सामने आया कि कहीं पैसों के लालच में अपने नाम की सिम और बैंकिंग सुविधा दूसरे को दी गई, कहीं परिचित को सिम थमा दी गई और कहीं ग्रामीणों से जमीन का काम, परिवार आईडी या समूह ऋण दिलाने के नाम पर आधार, फोटो और बायोमेट्रिक लेकर उनके नाम पर SIM जारी कराई गई।
यानी पुलिस अब सिर्फ “ठगी किसने की?” तक नहीं रुक रही, बल्कि यह भी तलाश रही है कि “ठगी के लिए इस्तेमाल हुआ मोबाइल नंबर अपराधी तक पहुंचा कैसे?”
₹2 हजार के लालच में SIM और ATM कार्ड दे दिया
ब्यावरा शहर के एक मामले में पुलिस को पता चला कि धर्मेन्द्र भिलाला ने वर्ष 2024 में राजा वर्मा के कहने पर अपने नाम से बैंक खाता खुलवाया और अपनी SIM तथा ATM कार्ड उसे दे दिया। इसके बदले उसे ₹2 हजार मिले।
बाद में इसी सिम का संबंध साइबर फ्रॉड की शिकायत से सामने आया। पुलिस ने धर्मेन्द्र को गिरफ्तार किया है, जबकि राजा वर्मा की तलाश जारी है।
यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि कुछ हजार रुपए के लालच में किसी दूसरे को SIM और बैंकिंग सुविधा देना बाद में गंभीर कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है।
किसी ने परिचित को SIM दी, उसी से हो गई ₹4,600 की ठगी
बोड़ा थाना क्षेत्र में मोबाइल नंबर 6265535668 की जांच में सामने आया कि SIM राहुल कुशवाह के नाम पर थी, लेकिन उसने यह SIM अपने परिचित अर्जुन कुशवाह को दे दी थी।
पुलिस के अनुसार इसी नंबर से दो लोगों से ₹4 हजार और ₹600, यानी कुल ₹4,600 की धोखाधड़ी की गई। मामले में अर्जुन को गिरफ्तार किया गया।
यहां सवाल सिर्फ ठगी का नहीं, बल्कि अपने नाम पर जारी SIM दूसरे व्यक्ति को देने का भी है।
नौकरी दिलाने के नाम पर ₹6,200 की ठगी
खिलचीपुर में मोबाइल नंबर 6232639004 की जांच पुलिस को साइबर शिकायतों के आधार पर करनी पड़ी। पूछताछ के बाद पुलिस के अनुसार इस नंबर से नौकरी दिलाने के नाम पर दो लोगों से ₹4,100 और ₹2,100, कुल ₹6,200 की धोखाधड़ी की गई।
मामले में गिरिराज पिता शिवसिंह वर्मा निवासी बोरदा नजदीक को गिरफ्तार किया गया है। उसके कब्जे से मोबाइल फोन जब्त किया गया।
जमीन का काम बताकर लिया आधार, फोटो और फिंगरप्रिंट; 7 SIM की जांच
माचलपुर का मामला साइबर फ्रॉड की एक अलग कड़ी सामने लाता है। पुलिस ने ऑपरेशन FAST-2.0 के तहत 7 संदिग्ध SIM की जांच की।
पुलिस के मुताबिक ग्रामीणों को जमीन संबंधी काम और परिवार आईडी/KYC अपडेट कराने के नाम पर बुलाया गया। इस दौरान उनके आधार कार्ड, फोटो और फिंगरप्रिंट लिए गए और उनके नाम से SIM जारी कराई गईं।
जांच में शोभाराम मेवाड़े की भूमिका सामने आने के बाद प्रकरण दर्ज किया गया। पूछताछ में पुलिस के अनुसार शोभाराम ने बताया कि SIM भैरूलाल मेवाड़े को बेची गई थीं। इसके बाद भैरूलाल मेवाड़े निवासी धानिया को गिरफ्तार किया गया। उसके कब्जे से वीवो मोबाइल और ₹10 हजार नकद जब्त किए गए।
समूह लोन के नाम पर आधार-अंगूठा इस्तेमाल, 5 नंबर जांच के घेरे में
सारंगपुर में पुलिस ने 5 संदिग्ध मोबाइल नंबरों की जांच की। ये नंबर अलग-अलग लोगों के नाम पर जारी पाए गए, लेकिन संबंधित लोगों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने न तो ये नंबर खरीदे और न ही इस्तेमाल किए।
पूछताछ में समूह ऋण दिलाने के नाम पर आधार कार्ड और अंगूठे का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई। पुलिस के अनुसार POS संचालक और संबंधित व्यक्तियों के बयानों के आधार पर संदीप वर्मा निवासी लालपुरा की भूमिका प्रथम दृष्टया सामने आई। आरोपी को गिरफ्तार कर मोबाइल फोन जब्त किया गया।
नाम किसी और का, SIM बेटा चला रहा था; ₹80 हजार का फ्रॉड
तलेन में मोबाइल नंबर 7354406988 बालचंद मालवीय के नाम पर था, लेकिन पुलिस के अनुसार उसका इस्तेमाल उसका पुत्र सोनू मालवीय कर रहा था।
जांच के दौरान सोनू पर इस SIM के जरिए ₹80 हजार की साइबर धोखाधड़ी किए जाने की जानकारी सामने आई। आरोपी सोनू मालवीय, उम्र 24 वर्ष, निवासी तलेन को गिरफ्तार किया गया।
पैसे लेकर कंपनी को SIM देता था, हर महीने मिलती थी रकम
ब्यावरा शहर के दूसरे मामले में दो मोबाइल नंबर 8878069334 और 7509968144 भास्कर मिर्धा के नाम पर पाए गए।
पुलिस के अनुसार भास्कर ने पैसों के लालच में अपने नाम से दोनों SIM हासिल कर एक कंपनी को उपलब्ध कराई थीं। इसके बदले उसे कुछ समय तक हर महीने रकम मिलती रही। मामले में भास्कर मिर्धा को गिरफ्तार किया गया।
SIM वापस नहीं मिली, जांच में सामने आया साइबर फ्रॉड से कनेक्शन
ब्यावरा शहर के एक अन्य मामले में मोबाइल नंबर 7697682387 सोनू राजपूत के नाम पर मिला। पूछताछ में सोनू ने बताया कि उसने वर्ष 2024 में यह SIM अपने परिचित मंथन नामदेव को दे दी थी और इसके बाद SIM वापस नहीं मिली।
पुलिस के अनुसार साइबर फ्रॉड से संबंधित जांच में मंथन की भूमिका प्रथम दृष्टया सामने आई है। उसके खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश की जा रही है।
एक नंबर से खुल रही पूरी चेन—POS एजेंट से असली यूजर तक
ऑपरेशन FAST-2.0 में राजगढ़ पुलिस का फोकस सिर्फ मोबाइल नंबर तक सीमित नहीं है। जांच में SIM किस POS एजेंट से जारी हुई, किस व्यक्ति के नाम पर है, किसने उसे हासिल किया और आखिर उसका वास्तविक उपयोग कौन कर रहा था, इन सभी कड़ियों को जोड़ा जा रहा है।
यही वजह है कि कार्रवाई में SIM धारकों के साथ-साथ उन लोगों की भूमिका भी जांच में आई, जिन्होंने किसी दूसरे को SIM या बैंकिंग सुविधा उपलब्ध कराई।
पुलिस के अनुसार आगे की जांच में साइबर अपराध से जुड़े अन्य लोगों और नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल: आपके नाम पर कितनी SIM चल रही हैं?
राजगढ़ पुलिस की कार्रवाई के बाद आम आदमी के लिए सबसे जरूरी सवाल यही है कि उसके नाम पर जारी SIM का इस्तेमाल कहीं कोई दूसरा व्यक्ति तो नहीं कर रहा।
कई मामलों में लोग पहचान-पत्र, बायोमेट्रिक या SIM को मामूली चीज समझकर दूसरे व्यक्ति को दे देते हैं। लेकिन वही SIM यदि किसी साइबर अपराध में इस्तेमाल हो जाए तो जांच की पहली कड़ी SIM के नाम से शुरू हो सकती है।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अपने नाम की SIM किसी दूसरे व्यक्ति को न दें और पैसों के बदले SIM, बैंक खाता, ATM/डेबिट कार्ड या UPI सुविधा किसी को उपलब्ध न कराएं।
पुलिस की अपील
SIM केवल अधिकृत POS एजेंट/विक्रेता से ही लें।
अनजान व्यक्ति को आधार, OTP, फोटो या बायोमेट्रिक जानकारी न दें।
अपने नाम की SIM किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए न दें।
बैंक खाता, ATM/डेबिट कार्ड और UPI की सुविधा किसी अन्य को उपलब्ध न कराएं।
साइबर फ्रॉड होने पर तत्काल 1930 पर शिकायत करें।
ऑनलाइन शिकायत के लिए cybercrime.gov.in का उपयोग करें।
पुलिस टीम की भूमिका
कार्रवाई पुलिस अधीक्षक अमित तोलानी के मार्गदर्शन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के.एल. बंजारे के निर्देशन में की गई। साइबर सेल प्रभारी उप निरीक्षक जितेन्द्र अजनारे सहित साइबर सेल और खिलचीपुर, ब्यावरा शहर, माचलपुर, तलेन, सारंगपुर तथा बोड़ा थाना पुलिस की टीम ने संदिग्ध नंबरों के तकनीकी विश्लेषण, KYC/CAF दस्तावेजों की जांच और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ में भूमिका निभाई।