सारंगपुर। सारंगपुर जनपद क्षेत्र के पांदा गांव में करीब छह साल से लंबित गौशाला का निर्माण आखिरकार शुरू हो गया है। गौशाला का निर्माण शुरू हुआ तो कुछ लोगों के पेट में दर्द होने की खबरें मिल रही है। निर्माण होते ही गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया को लेकर कुछ ग्रामीणों के साथ यूट्यूबर द्वारा निर्माण कार्य को लेकर आपत्तियां जताए जाने के बाद मामला चर्चा में है। वहीं पंचायत और प्रशासन का कहना है कि निर्माण कार्य नियमानुसार और अधिकारियों की निगरानी में कराया जा रहा है तथा काम पूरा होने के बाद मूल्यांकन के आधार पर ही गुणवत्ता तय होगी।
प्रशासन के अनुसार गौशाला करीब छह साल पहले स्वीकृत हुई थी, लेकिन अलग-अलग कारणों से इसका निर्माण शुरू नहीं हो सका। इस दौरान गांव और आसपास के क्षेत्र में गोवंश के सड़कों पर घूमने की समस्या बनी रही। बारिश के दौरान सड़क पर गोवंश के साथ होने वाली दुर्घटनाओं और उनकी सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती थी।
जनता की मांग पर फिर उठा मामला
गांव में गौशाला निर्माण की मांग लंबे समय से थी। जानकारी अनुसार मंडल अध्यक्ष विनोद पाटीदार ने ग्रामीणों की मांग को लेकर मंत्री डॉ. गौतम टेटवाल और प्रशासन के समक्ष मामला रखा। इसके बाद लंबित कार्य को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हुई और अब निर्माण कार्य जमीन पर दिखाई देने लगा है।
निर्माण शुरू होने के बाद कुछ लोगों ने इसकी गुणवत्ता और प्रक्रिया पर सवाल उठाए। मंडल अध्यक्ष पर ठेकेदार होने के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि संबंधित पक्ष इन आरोपों से अलग अपना पक्ष रख रहा है।
अधिकारी बोले- अभी निर्माण चल रहा, मूल्यांकन के बाद होगी कार्रवाई
जनपद के एसडीओ कृपाल पैरवाल और मूल्यांकन से जुड़े अधिकारियों के अनुसार निर्माण कार्य की निगरानी नियमानुसार की जा रही है। उनका कहना है कि यदि निर्माण में किसी तरह की कमी पाई जाती है तो मूल्यांकन के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का तर्क है कि अभी निर्माण कार्य प्रारंभिक अवस्था में है, इसलिए अंतिम गुणवत्ता को लेकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
सरपंच बोले- मनरेगा की प्रक्रिया के कारण छह साल से अटका था काम
सरपंच प्रतिनिधि दीपसिंह सोनगरा ने बताया कि गौशाला निर्माण मनरेगा योजना से स्वीकृत था। मनरेगा के कार्यों में राशि आहरण और अन्य प्रक्रियाओं के कारण काम लंबे समय से लंबित था। उन्होंने कहा कि वे सामान्यतः मनरेगा के कार्यों की प्रक्रिया में नहीं पड़ते, लेकिन गौशाला का मामला गोवंश संरक्षण से जुड़ा होने और ग्रामीणों की मांग के कारण पंचायत ने कार्य स्वीकार किया।
सरपंच के अनुसार पूर्व सरपंच की भी गांव में गौशाला बनाने की इच्छा थी, उनका ऐसा भाव था की गांव में गौशाला बने। लेकिन निर्धारित समयावधि पूरी होने के कारण कार्य शुरू नहीं हो पाया। अब सभी के आग्रह और गोवंश संरक्षण की जरूरत को देखते हुए निर्माण शुरू कराया गया है।
उन्होंने कहा कि पूरा काम प्रशासन की देखरेख में नियमानुसार कराया जा रहा है। निर्माण शुरू होने के बाद उठ रहे सवालों पर सरपंच ने तंज कसते हुए कहा, “काम शुरू नहीं हुआ तो सिरदर्द था, अब काम शुरू हो गया तो कुछ लोगों के पेट में दर्द हो रहा है। उनका इलाज भी गौमाता ही करेगी।”
फिलहाल गौशाला निर्माण को लेकर उठे सवालों का अंतिम जवाब निर्माण पूरा होने के बाद होने वाले तकनीकी मूल्यांकन और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट से ही सामने आएगा।