सनबीम स्कूल मुगलसराय में सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित ‘इकोज ऑफ हेरिटेज’ का भव्य आयोजन
दुलहीपुर स्थित सनबीम स्कूल मुगलसराय में 29 सितंबर, दिन मंगलवार को कक्षा 3 से 5 तक के विद्यार्थियों द्वारा वार्षिकोत्सव के अंतर्गत ‘इकोज ऑफ हेरिटेज—पहिए से भारत के भविष्य तक’ विषय पर भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत को अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता के साथ जीवंत किया।इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई विशेष प्रदर्शनी में भारत के प्रमुख त्योहारों, संस्कृति, वेशभूषा, हस्तशिल्प, परिवहन एवं संचार से संबंधित मॉडल और कलाकृतियां प्रदर्शित की गईं। आवश्यकता, लालच, गति, स्थिरता और मोक्ष जैसे विषयों पर आधारित जीवंत मॉडल एवं झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं।कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथि डॉ. खिलेश्वरी पटेल, सहायक प्रोफेसर, प्रदर्शन कला संकाय, बीएचयू; माँ खंडवारी विद्यालय एवं महाविद्यालय समूह के सचिव डॉ. राजेंद्र प्रताप सिंह, एवं उनके पुत्र एवं संस्था के प्रबंध निदेशक डॉ. आशुतोष सिंह; प्रख्यात लेखिका श्रीमती दीपाली राजकृष्ण; श्री अनिल यादव, सामाजिक कार्यकर्ता एवं प्रबंध निदेशक, साईं पब्लिक स्कूल, मुगलसराय तथा श्री मृत्युंजय सिंह, प्रबंध निदेशक, स्कॉलर्स स्कूल एंड हॉस्टल ने तुलसी वेदी पर दीप प्रज्वलन करके किया। तत्पश्चात् विद्यालय के सेक्रेटरी श्री यदुराज कनूडिया व डायरेक्टर श्रीमती श्वेता कनूडिया , एडिशनल डायरेक्टर श्रीमती श्रुति अग्रवल्ला , प्रधानाचार्या श्रीमती सौमिता चटर्जी, डीन यू. बी. रॉय, उप. प्रधानाचार्य श्री राम प्रताप सिंह ने संयुक्त रूप से अतिथियों का स्वागत ‘पुस्तक’ और ‘अंगवस्त्र’ भेंट कर किया ।कार्यक्रम में मालवा लोकगीत, ध्रुपद गायन, मुखौटा नृत्य, नाट्य प्रस्तुति, सूफी नृत्य, दामिंदा लोकगीत, मार्शल आर्ट, मूकाभिनय, पाश्चात्य गीत, धनगर नृत्य एवं ओडिशा नृत्य जैसी मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की विषयवस्तु को निरंतरता प्रदान करने के लिए विभिन्न प्रस्तुतियों के मध्य दस लघु श्रव्य-दृश्य प्रस्तुतियां भी प्रदर्शित की गईं।इस अवसर पर मुख्य अतिथियों ने कहा – कि सनबीम स्कूल के विद्यार्थियों ने भारतीय विरासत, संस्कृति और इतिहास को अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से जिस सुंदरता और रचनात्मकता के साथ जीवंत किया है, वह सराहनीय है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास और प्रतिभा को भी निखारते हैं।कार्यक्रम के सुअवसर पर विद्यालय की निदेशिका श्रीमती श्वेता कानूडिया ने कहा कि हमारा उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल आधुनिक ज्ञान से जोड़ना ही नहीं, बल्कि उन्हें अपनी समृद्ध सांस्कृतिक जड़ों और विरासत से भी परिचित कराना है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास और अपनी संस्कृति के प्रति गौरव की भावना विकसित करते हैं।वहीं प्रधानाचार्या श्रीमती सौमिता चटर्जी ने विद्यालय की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा- कि हमारे विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से यह सिद्ध किया है कि जब शिक्षा को संस्कृति, इतिहास और रचनात्मक अभिव्यक्ति से जोड़ा जाता है, तो सीखना और भी प्रभावशाली एवं आनंददायक बन जाता है। यह आयोजन विद्यार्थियों की प्रतिभा और परिश्रम का सुंदर प्रतिबिंब है।वार्षिकोत्सव के इस अवसर पर विद्यालय के सीनियर कोऑर्डिनेटर राजेश सिन्हा, एकेडमिक हेड साधना सिंह तथा पैरेलल करिकुलम हेड डॉ. गुंजन सिंह , जूनियर विंग कोऑर्डिनेटर ममता जायसवाल , अनामिका सिंह और आकांक्षा पांडेय सहित सभी शिक्षक शिक्षिकाएं उपस्थित रहे
