चंदौली

पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन में एचआईवी ‘हॉट स्पॉट’ की पुष्टि, आयोग के निर्देश पर जिलाधिकारी करेंगे जांच

चंदौली

जनपद चंदौली स्थित पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन क्षेत्र में एचआईवी संक्रमण की गंभीर स्थिति सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। यह मामला सार्वजनिक स्वास्थ्य, जीवन के अधिकार और मानवीय गरिमा से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।प्राप्त जानकारी के अनुसार पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन को एचआईवी संक्रमण का “हॉट स्पॉट” घोषित किया गया है। तीन माह तक चले विशेष अभियान के दौरान एक हजार से अधिक व्यक्तियों की जांच की गई, जिसमें 10 लोग एचआईवी पॉजिटिव पाए गए। इनमें कुछ रेलकर्मी भी शामिल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा जिले में वर्तमान समय में 82 एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों का उपचार चल रहा है, जबकि वर्ष 2025-26 के दौरान 32 नए संक्रमित मामले सामने आए हैं।इस गंभीर मामले को लेकर अधिवक्ता एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता खालिद वकार आबिद ने 27 जनवरी 2026 को राज्य मानवाधिकार आयोग में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने 28 जनवरी 2026 को आदेश पारित किया। आयोग ने जिलाधिकारी चंदौली को निर्देश दिया है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की प्रकृति को देखते हुए पूरे प्रकरण की जांच कर कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए।खालिद वकार आबिद ने आरोप लगाया कि यह स्थिति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन एवं स्वास्थ्य के अधिकार, सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के दायित्व तथा कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षित वातावरण के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है।उन्होंने कहा कि इतने बड़े और अत्यंत व्यस्त रेलवे जंक्शन पर प्रतिदिन हजारों यात्रियों, श्रमिकों, घुमंतू आबादी और कर्मचारियों की आवाजाही के बावजूद समय रहते प्रभावी रोकथाम, नियमित स्क्रीनिंग, जागरूकता और नियंत्रण की व्यवस्था नहीं की गई, जिसके कारण संक्रमण के फैलने की आशंका बढ़ी।उन्होंने यह भी चिंता जताई कि एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों के साथ सामाजिक भेदभाव, चिकित्सा सुविधाओं में लापरवाही, पहचान की गोपनीयता तथा पुनर्वास से जुड़े मानवाधिकार भी इस मामले में प्रभावित हो सकते हैं।मानवाधिकार कार्यकर्ता खालिद वकार आबिद ने पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और तथ्यात्मक जांच कराने, रेलवे प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग एवं राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी की भूमिका तय करने, संक्रमित व्यक्तियों को निःशुल्क, गोपनीय और निरंतर उपचार व परामर्श उपलब्ध कराने तथा स्टेशन परिसर और संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित जांच और व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने की मांग की है। उन्होंने भविष्य में संक्रमण की रोकथाम के लिए स्थायी सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्ययोजना लागू किए जाने पर भी जोर दिया।खालिद वकार आबिद ने कहा कि यह मामला केवल स्वास्थ्य से जुड़ा नहीं है, बल्कि मानव गरिमा, जीवन की सुरक्षा और राज्य के संवैधानिक दायित्वों से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है।

 

 

 

 

 

 

सूर्य प्रकाश सिंह की रिपोर्ट