जनपद चंदौली के अलीनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत परोरवा गांव में युवक राजकुमार भारती की नृशंस हत्या के मामले में राज्य मानवाधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता खालिद वकार आबिद की शिकायत पर आयोग ने संज्ञान लेते हुए पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ज्ञात हो कि परोरवा गांव निवासी रामकरण भारती के 20 वर्षीय पुत्र राजकुमार भारती 10 नवंबर 2025 की रात लगभग 10 बजे लापता हो गए थे। इसके बाद उनका खून से लथपथ शव गांव से करीब 250 मीटर दूर खेत में बने गिरधारी चौहान के करकटनुमा मकान में पाया गया। युवक की ईंटों से सिर कुचलकर अत्यंत निर्ममता से हत्या की गई थी।मृतक के परिजनों के अनुसार, राजकुमार मजदूरी करता था और स्वभाव से बेहद सरल एवं सौम्य था। उसकी मां ने बताया कि घटना वाली रात वह गांव के चार युवकों के साथ रविदास मंदिर के पास बैठा हुआ था। देर होने पर मां उसे घर बुलाने गई, लेकिन वह “अभी आता हूं” कहकर वहीं रुक गया। इसके बाद वह पूरी रात घर नहीं लौटा। अगली सुबह काफी तलाश के बावजूद उसका कोई सुराग नहीं मिल सका।मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे बकरी चराने गई महिलाओं ने खेत में बने मकान के अंदर शव देखा, जिसके बाद गांव में हड़कंप मच गया। सूचना पर मौके पर एएसपी अनंत चंद्रशेखर, सीओ कृष्णमुरारी शर्मा, थानाध्यक्ष अलीनगर अनिल पांडेय तथा मुगलसराय थानाध्यक्ष गगनराज पुलिस बल के साथ पहुंचे। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, वहीं फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से खून के नमूने भी एकत्र किए।घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद न तो किसी आरोपी का नाम सामने आया और न ही किसी प्रकार की गिरफ्तारी हो सकी, जिससे पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए।इस गंभीर मामले को लेकर अधिवक्ता खालिद वकार आबिद ने 13 नवंबर 2025 को राज्य मानवाधिकार आयोग में लिखित शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने प्रशासनिक लापरवाही, कानून-व्यवस्था की विफलता और पीड़ित परिवार को न्याय न मिलने का आरोप लगाते हुए दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई, पीड़ित परिवार को तत्काल मुआवजा देने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।शिकायत पर संज्ञान लेते हुए राज्य मानवाधिकार आयोग ने 14 नवंबर 2025 को आदेश पारित किया। आयोग ने पुलिस अधीक्षक, चंदौली को निर्देश दिया कि शिकायतकर्ता को जांच में सम्मिलित करते हुए मामले की विस्तृत रिपोर्ट 7 जनवरी 2026 तक आयोग को प्रस्तुत की जाए। हालांकि, निर्धारित तिथि तक न तो आयोग को कोई रिपोर्ट प्राप्त हुई और न ही मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता खालिद वकार आबिद को उक्त घटना की जांच में शामिल किया गया।इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए आयोग ने पुलिस अधीक्षक, चंदौली को निर्देशित किया है कि वे या तो व्यक्तिगत रूप से आयोग के समक्ष उपस्थित हों अथवा अनिवार्य रूप से अपनी रिपोर्ट 18 फरवरी 2026 तक प्रस्तुत करें। मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है।
सूर्य प्रकाश सिंह की रिपोर्ट