राजगढ़

हराना में आठ दशकों से चली आ रही भागवत कथा की परंपरा:

राजगढ़

हराना। श्रीराम-जानकी मंदिर में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथावाचक पं. मनीष शास्त्री ने भगवान के 24 अवतारों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने विभिन्न अवतारों के माध्यम से धर्म, सत्य, त्याग और सदाचार का महत्व समझाया। कथा के दौरान कंदर्प ऋषि एवं माता सती अनुसूया की पतिव्रता की कथा का भी वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। कथावाचक पं. मनीष शास्त्री ने कहा कि भगवान के प्रत्येक अवतार का उद्देश्य मानव समाज को धर्म और सदमार्ग की प्रेरणा देना है। उन्होंने श्रद्धालुओं को भगवान के प्रति आस्था रखने के साथ ही अपने जीवन में सत्य, संयम, सेवा और सदाचार को अपनाने का संदेश दिया। सती अनुसूया की पतिव्रता की कथा का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी के त्याग, तपस्या और पतिव्रत धर्म को विशेष स्थान प्राप्त है। कथा के दौरान भजन-कीर्तन और धार्मिक प्रसंगों से मंदिर परिसर भक्तिमय बना रहा। आठ दशकों से चली आ रही कथा की परंपरा गांव के पटेल मांगीलाल नागर, पं. मोहनलाल व्यास, रामविलास पटेल, भागीरथ नागर, लक्ष्मीनारायण चौधरी, भारत नागर, डालचंद गोठवाल, फूलसिंह भंडारी, देवीलाल नागर, दुर्गाप्रसाद नागर, ललित नागर, लक्ष्मीनारायण नागर, जगदीश कोडक्या, मांगीलाल नागर, शंकर मंडलौई ,दिलीप राठौर, दुर्गाप्रसाद पुष्पद देवकरण नागर ,आदि ग्रामीणो ने बताया कि हराना के श्रीराम-जानकी मंदिर में सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन की परंपरा करीब आठ दशकों से लगातार चली आ रही है। यह धार्मिक आयोजन मंदिर से जुड़े शास्त्री परिवार द्वारा प्रतिवर्ष सावन अथवा भादवा माह में किया जाता है। बताया गया कि मंदिर पुजारी के दादाजी कन्हैयालाल शास्त्री के समय से शुरू हुई यह परंपरा उनके बाद फिर उनके पुत्र मोहनलाल शास्त्री और अब उनके पुत्र पं. मनीष शास्त्री द्वारा आगे बढ़ाई जा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि यह आयोजन केवल कथा सुनने तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। श्रीराम-जानकी मंदिर में विराजित भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, माता सीता, हनुमानजी एवं भगवान शिव को साक्षी मानकर श्रद्धालु भागवत कथा का श्रवण करते हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण मंदिर पहुंचकर कथा का लाभ ले रहे हैं।