पड़ाव-मुगलसराय मार्ग पर खड़े ट्रैक्टर में घुसी स्कूटी, मामा-भांजे की दर्दनाक मौत… अंधेरे ने अब तक 7 जिंदगियां निगल लीं! आखिर कब जलेगी सिक्स लेन की लाइट?

एक बार फिर सड़क पर पसरे अंधेरे ने दो परिवारों के घरों में मातम पहुंचा दिया। पड़ाव से मुगलसराय की तरफ जा रहे स्कूटी सवार मामा-भांजे की सड़क किनारे खड़े ट्रैक्टर से टकराने के बाद दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद परिवारों में कोहराम मचा है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर उस गंभीर सवाल को खड़ा कर दिया है, जिसका जवाब जिम्मेदार अधिकारियों को देना चाहिए।
आखिर पड़ाव-मुगलसराय मार्ग पर कब तक अंधेरा मौत बांटता रहेगा?
शनिवार की भोर करीब चार बजे मुगलसराय थाना क्षेत्र के जलीलपुर गांव स्थित घंटावीर बाबा मंदिर के पास यह दर्दनाक हादसा हुआ। स्कूटी सवार उस्मान (32), निवासी सतपोखरी, अपने 47 वर्षीय मामा जुबैर, निवासी रायबरेली के साथ पड़ाव से मुगलसराय की तरफ जा रहे थे। इसी दौरान सड़क किनारे खड़े ट्रैक्टर में उनकी स्कूटी पीछे से जा घुसी।
टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने तत्काल दोनों को लतीफ अस्पताल पहुंचाया, जहां से हालत गंभीर होने पर वाराणसी ट्रामा सेंटर रेफर किया गया। लेकिन वहां चिकित्सकों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।
दो मौतें… दो परिवारों का उजड़ता संसार… और पीछे छूट गए कई सवाल!
पड़ाव से मुगलसराय तक करीब एक साल पहले सड़क को सिक्स लेन बनाया गया। सड़क चौड़ी हुई, वाहनों की रफ्तार बढ़ी, आवागमन पहले से तेज हुआ। लेकिन जिस सड़क पर गाड़ियां तेज गति से दौड़ रही हैं, वहां शाम होते ही अंधेरा छा जाता है।
विडंबना देखिए, सड़क चौड़ी और बेहतर तो हो गई, लेकिन रात में सुरक्षित सफर की व्यवस्था अब तक अधूरी है। अंधेरे में सड़क किनारे खड़े ट्रक, ट्रैक्टर और अन्य वाहन दूर से दिखाई नहीं देते। तेज रफ्तार में आने वाले दोपहिया वाहन चालकों को संभलने का मौका तक नहीं मिलता और देखते ही देखते हादसा हो जाता है।
स्थानीय स्तर पर सामने आए हादसों के विवरण के मुताबिक, वर्ष 2025 से अब तक इस मार्ग पर अंधेरे और सड़क किनारे खड़े वाहनों से टकराने की घटनाओं में सात लोगों की जान जा चुकी है।
हर हादसे के बाद कुछ देर चर्चा होती है, फिर सबकुछ सामान्य हो जाता है। लेकिन जिन घरों में मौत पहुंचती है, वहां जिंदगी कभी सामान्य नहीं होती।
यह मार्ग अब पहले से अधिक तेज यातायात वाला हो गया है। ऐसे में रात के समय प्रकाश व्यवस्था का अभाव और सड़क पर बेतरतीब खड़े भारी वाहन जानलेवा साबित हो रहे हैं।
सवाल यह है कि सड़क किनारे ट्रक और ट्रैक्टर खड़े करने की अनुमति आखिर किसने दी? उन्हें हटाने की जिम्मेदारी किसकी है? रात में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किस विभाग की है?
क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
क्या सात मौतें कम हैं? क्या दस मौतों के बाद सड़क पर लाइट जलेगी? या फिर किसी और परिवार के उजड़ने के बाद जिम्मेदार अधिकारी जागेंगे?
सड़क विकास का मतलब सिर्फ चौड़ी सड़क बनाना नहीं, बल्कि सुरक्षित सफर सुनिश्चित करना भी है।
आज मामा-भांजे की मौत हुई है। कल किसी और का बेटा, भाई, पिता या परिवार का सदस्य इस अंधेरे का शिकार हो सकता है।
अब वक्त आ गया है कि जिम्मेदार विभाग नींद से जागें, सड़क पर प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करें और अवैध रूप से खड़े वाहनों पर सख्त कार्रवाई करें।