सारंगपुर। तहसील क्षेत्र के भैंसवा माता स्थित शराब ठेके पर एक्सपायरी डेट की बीयर बेचे जाने का मामला सामने आया है। यहां किंगफिशर बीयर खरीदने पहुंचे ग्राहकों ने जब बोतलों पर लिखी एक्सपायरी डेट देखी तो उनके होश उड़ गए। बीयर की अंतिम उपयोग तिथि 1 नवंबर थी, लेकिन इसके चार दिन बाद भी 5 नवंबर तक ठेके पर ग्राहकों को एक्सपायरी डेट की बीयर बेची जा रही थी। बताया जा रहा है कि कई ग्राहक अनजाने में यह बीयर पी भी चुके थे।
मामले की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने विरोध जताते हुए जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। इसके बाद लीमाचौहान पुलिस और आबकारी विभाग की टीम मौके पर पहुंची। हालांकि, आरोप है कि टीम के पहुंचने से पहले ही ठेकेदार ने कई बोतलें ठेके के पीछे खाली कर दीं। आबकारी टीम कुछ बोतले जब्त कर अपने साथ ले गई। अब सवाल यह है कि जब्त की गई बीयर की जांच और एक्सपायरी स्टॉक के निस्तारण को लेकर विभाग क्या कार्रवाई करता है।
जहरीली शराब की घटनाओं के बाद भी लापरवाही?
प्रदेश के सागर और देवास जिलों में जहरीली शराब से मौतों की घटनाओं के बाद भी यदि शराब ठेकों पर एक्सपायरी डेट के उत्पाद बेचे जा रहे हैं तो यह आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। शराब की गुणवत्ता और उसकी वैधता सुनिश्चित करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है। ऐसे में सवाल उठता है कि एक्सपायरी स्टॉक ठेके तक कैसे पहुंचा और जिम्मेदारों ने समय रहते इसकी जांच क्यों नहीं की?
गांव-गांव शराब बिक्री, अवैध दुकानों पर भी सवाल
स्थानीय स्तर पर पदमपुरा, सुस्तानी सहित कई गांवों में अवैध रूप से शराब बिक्री की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। नागरिकों का आरोप है कि सारंगपुर तहसील के कई गांवों में देशी और अंग्रेजी शराब आसानी से उपलब्ध हो रही है। यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि ठेकेदारों की ओर से गांवों तक शराब की सप्लाई करवाई जा रही है।
अब देखना होगा कि आबकारी विभाग केवल बीयर की कुछ पेटियां जब्त करने तक सीमित रहता है या संबंधित ठेकेदार के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई कर पूरे मामले की जांच करता है।